श्लोकपाठShlokpath

सप्तमोऽध्यायः

चण्डमुण्डवधः

Chaṇḍamuṇḍavadhaḥ

Chapter 7: The slaying of Caṇḍa and Muṇḍa

  • Durgā Saptaśatī
  • The last episode · Mahāsarasvatī
  • 27 mantras

Caṇḍa and Muṇḍa come against the Goddess. From her brow, dark with anger, springs Kālī, who slays them both; the Goddess names her Cāmuṇḍā.

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ध्यानम्

ॐ ध्यायेयं रत्नपीठे शुककलपठितं शृण्वतीं श्यामलाङ्गीं
न्यस्तैकाङ्घ्रिं सरोजे शशिशकलधरां वल्लकीं वादयन्तीम् ।
कह्लाराबद्धमालां नियमितविलसच्चोलिकां रक्तवस्त्रां
मातङ्गीं शङ्खपात्रां मधुरमधुमदां चित्रकोद्भासिभालाम्

oṃ dhyāyeyaṃ ratnapīṭhe śukakalapaṭhitaṃ śṛṇvatīṃ śyāmalāṅgīṃ
nyastaikāṅghriṃ saroje śaśiśakaladharāṃ vallakīṃ vādayantīm |
kahlārābaddhamālāṃ niyamitavilasachcholikāṃ raktavastrāṃ
mātaṅgīṃ śaṅkhapātrāṃ madhuramadhumadāṃ chitrakodbhāsibhālām

ॐ मी मातंगी देवीचे ध्यान करतो: रत्नसिंहासनावर बसून पोपटाचे मधुर बोल ऐकणारी, श्यामवर्णा, एक पाय कमळावर ठेवलेली, अर्धचंद्र धारण करणारी, वीणा वाजवणारी; कह्लार फुलांची माळ, आटोपशीर चोळी आणि लाल वस्त्र धारण करणारी; हातात शंखपात्र असलेली, मधुर मधुमदाने युक्त, कपाळी तिलकाने शोभणारी.

ॐ मैं मातंगी देवी का ध्यान करता हूँ। वे रत्नमय सिंहासन पर बैठकर पढ़ते हुए तोते का मधुर शब्द सुन रही हैं। उनके शरीर का वर्ण श्याम है। वे अपना एक पैर कमल पर रखे हुए हैं, मस्तक पर अर्धचन्द्र धारण करती हैं और कह्लार पुष्पों की माला पहने वीणा बजाती हैं। उनके अंगों में कसी हुई चोली शोभा पा रही है। वे लाल रंग की साड़ी पहने, हाथ में शंखमय पात्र लिए हुए हैं, मधुर मधु के मद से युक्त हैं और उनके ललाट में तिलक शोभा देता है।

Om. I meditate on Mātaṅgī: seated on a jewelled throne, listening to the sweet speech of a parrot, dark of body, one foot resting on a lotus, wearing the crescent moon, playing the vīṇā; wearing a garland of white lotuses, a close-fitting bodice and red garments; holding a conch-shell cup, intoxicated with sweet wine, her forehead bright with a tilaka.

ॐ ऋषिरुवाच ॥ १ ॥oṃ ṛṣiruvāchaॐ ऋषी म्हणाले:ॐ ऋषि बोले:Om. The sage said:

आज्ञप्तास्ते ततो दैत्याश्चण्डमुण्डपुरोगमाः ।
चतुरङ्गबलोपेता ययुरभ्युद्यतायुधाः ॥ २ ॥

ājñaptāste tato daityāśchaṇḍamuṇḍapurogamāḥ |
chaturaṅgabalopetā yayurabhyudyatāyudhāḥ

आज्ञा मिळताच चंड-मुंडांच्या नेतृत्वाखाली ते दैत्य चतुरंग सैन्यासह शस्त्रे उगारून निघाले.

तदनन्तर शुम्भ की आज्ञा पाकर वे चण्ड-मुण्ड आदि दैत्य चतुरंगिणी सेना के साथ अस्त्र-शस्त्रों से सुसज्जित हो चल दिए।

So ordered, the daityas, led by Caṇḍa and Muṇḍa, set out with an army of four divisions, weapons raised.

ददृशुस्ते ततो देवीमीषद्धासां व्यवस्थिताम् ।
सिंहस्योपरि शैलेन्द्रशृङ्गे महति काञ्चने ॥ ३ ॥

dadṛśuste tato devīmīṣaddhāsāṃ vyavasthitām |
siṃhasyopari śailendraśṛṅge mahati kāñchane

मग पर्वतराजाच्या मोठ्या सुवर्णशिखरावर सिंहावर बसलेली, मंद हसणारी देवी त्यांनी पाहिली.

फिर गिरिराज हिमालय के सुवर्णमय ऊँचे शिखर पर पहुँचकर उन्होंने सिंह पर बैठी देवी को देखा। वे मन्द-मन्द मुस्कुरा रही थीं।

Then they saw the Goddess, gently smiling, seated on the lion upon a great golden peak of the king of mountains.

ते दृष्ट्वा तां समादातुमुद्यमं चक्रुरुद्यताः ।
आकृष्टचापासिधरास्तथान्ये तत्समीपगाः ॥ ४ ॥

te dṛṣṭvā tāṃ samādātumudyamaṃ chakrurudyatāḥ |
ākṛṣṭachāpāsidharāstathānye tatsamīpagāḥ

तिला पाहून ते तिला पकडण्याच्या तयारीला लागले; इतर काही धनुष्ये ताणून, तलवारी घेऊन तिच्याजवळ आले.

उन्हें देखकर दैत्य लोग उन्हें पकड़ने का उद्योग करने लगे। किसी ने धनुष तान लिया, किसी ने तलवार सँभाली और कुछ लोग देवी के पास आकर खड़े हो गए।

Seeing her, they made ready to seize her; others came near her, bows drawn and swords in hand.

ततः कोपं चकारोच्चैरम्बिका तानरीन् प्रति ।
कोपेन चास्या वदनं मषीवर्णमभूत्तदा ॥ ५ ॥

tataḥ kopaṃ chakārochchairambikā tānarīn prati |
kopena chāsyā vadanaṃ maṣīvarṇamabhūttadā

तेव्हा अंबिका त्या शत्रूंवर अतिशय क्रुद्ध झाली, आणि क्रोधाने तिचे मुख शाईसारखे काळे झाले.

तब अम्बिका ने उन शत्रुओं के प्रति बड़ा क्रोध किया। उस समय क्रोध के कारण उनका मुख काला पड़ गया।

Then Ambikā grew fiercely angry at those enemies, and in her anger her face became dark as ink.

भ्रुकुटीकुटिलात्तस्या ललाटफलकाद् द्रुतम् ।
काली करालवदना विनिष्क्रान्तासिपाशिनी ॥ ६ ॥

bhrukuṭīkuṭilāttasyā lalāṭaphalakād drutam |
kālī karālavadanā viniṣkrāntāsipāśinī

भुवया वक्र झालेल्या तिच्या कपाळातून तत्काळ विक्राळ मुखाची काली प्रकट झाली, जिच्या हातांत खड्ग आणि पाश होते.

ललाट में भौंहें टेढ़ी हो गईं और वहाँ से तुरंत विकराल मुखी काली प्रकट हुईं, जो तलवार और पाश लिए हुए थीं।

From her forehead, knotted with frowning brows, there swiftly came forth Kālī, terrible of face, bearing sword and noose,

विचित्रखट्वाङ्गधरा नरमालाविभूषणा ।
द्वीपिचर्मपरीधाना शुष्कमांसातिभैरवा ॥ ७ ॥

vichitrakhaṭvāṅgadharā naramālāvibhūṣaṇā |
dvīpicharmaparīdhānā śuṣkamāṃsātibhairavā

ती विचित्र खट्वांग धारण केलेली, नरमुंडमाळेने भूषित, व्याघ्रचर्म नेसलेली होती; तिचे मांस सुकलेले असल्याने ती अतिशय भयंकर दिसत होती.

वे विचित्र खट्वांग धारण किए और नरमुण्डों की माला से विभूषित थीं। उन्होंने चीते के चर्म की साड़ी पहन रखी थी। उनके शरीर का मांस सूख गया था, इसलिए वे अत्यन्त भयंकर जान पड़ती थीं।

bearing a strange skull-topped staff, adorned with a garland of human heads, clad in a tiger’s skin, most terrible in her wasted flesh,

अतिविस्तारवदना जिह्वाललनभीषणा ।
निमग्नारक्तनयना नादापूरितदिङ्मुखा ॥ ८ ॥

ativistāravadanā jihvālalanabhīṣaṇā |
nimagnāraktanayanā nādāpūritadiṅmukhā

तिचे मुख अतिशय विशाल होते, लळलळणाऱ्या जिभेमुळे ती अधिकच भयानक वाटत होती; तिचे डोळे खोल गेलेले आणि लालसर होते, आणि ती गर्जनेने दिशा भरून टाकत होती.

उनका मुख बहुत विशाल था, जीभ लपलपाने के कारण वे और भी डरावनी प्रतीत होती थीं। उनकी आँखें भीतर को धँसी हुई और कुछ लाल थीं, वे अपनी भयंकर गर्जना से सम्पूर्ण दिशाओं को गुँजा रही थीं।

her mouth gaping wide, fearsome with her lolling tongue, her eyes sunken and reddish, filling the quarters with her roar.

सा वेगेनाभिपतिता घातयन्ती महासुरान् ।
सैन्ये तत्र सुरारीणामभक्षयत तद्बलम् ॥ ९ ॥

sā vegenābhipatitā ghātayantī mahāsurān |
sainye tatra surārīṇāmabhakṣayata tadbalam

मोठ्या वेगाने तुटून पडून महासुरांचा वध करत तिने तेथे देवशत्रूंच्या सैन्याचे भक्षण केले.

बड़े-बड़े दैत्यों का वध करती हुई वे कालिका देवी बड़े वेग से दैत्यों की उस सेना पर टूट पड़ीं और उन सबको भक्षण करने लगीं।

Swooping down at speed, slaughtering the great asuras, she devoured the army of the enemies of the gods there.

पार्ष्णिग्राहाङ्कुशग्राहियोधघण्टासमन्वितान् ।
समादायैकहस्तेन मुखे चिक्षेप वारणान् ॥ १० ॥

pārṣṇigrāhāṅkuśagrāhiyodhaghaṇṭāsamanvitān |
samādāyaikahastena mukhe chikṣepa vāraṇān

पार्श्वरक्षक, अंकुशधारी माहूत, योद्धे आणि घंटा यांसह कितीतरी हत्ती ती एका हातात धरून तोंडात टाकत होती.

वे पार्श्वरक्षकों, अंकुशधारी महावतों, योद्धाओं और घण्टा सहित कितने ही हाथियों को एक ही हाथ से पकड़कर मुँह में डाल लेती थीं।

Seizing elephants with one hand, together with their rear guards, the drivers with their goads, the warriors and the bells, she flung them into her mouth.

तथैव योधं तुरगै रथं सारथिना सह ।
निक्षिप्य वक्त्रे दशनैश्चर्वयन्त्यतिभैरवम् ॥ ११ ॥

tathaiva yodhaṃ turagai rathaṃ sārathinā saha |
nikṣipya vaktre daśanaiścharvayantyatibhairavam

त्याचप्रमाणे घोड्यांसह योद्धे आणि सारथ्यांसह रथ तोंडात टाकून ती दातांनी अतिशय भयानकपणे चावत होती.

इसी प्रकार घोड़ों सहित योद्धा, सारथि सहित रथ को मुँह में डालकर वे उन्हें बड़े भयानक रूप से दाँतों से चबा डालती थीं।

In the same way, putting into her mouth warriors with their horses, and chariots with their charioteers, she chewed them with her teeth, most terribly.

एकं जग्राह केशेषु ग्रीवायामथ चापरम् ।
पादेनाक्रम्य चैवान्यमुरसान्यमपोथयत् ॥ १२ ॥

ekaṃ jagrāha keśeṣu grīvāyāmatha chāparam |
pādenākramya chaivānyamurasānyamapothayat

कोणाला केसांनी धरले, कोणाला मानेला; कोणाला पायाखाली चिरडले, तर कोणाला छातीच्या धक्क्याने मारले.

किसी के बाल पकड़ लेतीं, किसी का गला दबा देतीं, किसी को पैरों से कुचल डालतीं और किसी को छाती के धक्के से गिराकर मार डालती थीं।

One she seized by the hair, another by the neck; another she trod underfoot, and another she crushed with her chest.

तैर्मुक्तानि च शस्त्राणि महास्त्राणि तथासुरैः ।
मुखेन जग्राह रुषा दशनैर्मथितान्यपि ॥ १३ ॥

tairmuktāni cha śastrāṇi mahāstrāṇi tathāsuraiḥ |
mukhena jagrāha ruṣā daśanairmathitānyapi

असुरांनी सोडलेली मोठी अस्त्रे-शस्त्रे ती रागाने तोंडात पकडून दातांनी चुरडत होती.

वे असुरों के छोड़े हुए बड़े-बड़े अस्त्र-शस्त्र मुँह से पकड़ लेतीं और रोष में भरकर उनको दाँतों से पीस डालती थीं।

The weapons and great missiles hurled by those asuras she caught in her mouth in fury, and ground them with her teeth.

बलिनां तद्बलं सर्वमसुराणां दुरात्मनाम् ।
ममर्दाभक्षयच्चान्यानन्यांश्चाताडयत्तथा ॥ १४ ॥

balināṃ tadbalaṃ sarvamasurāṇāṃ durātmanām |
mamardābhakṣayachchānyānanyāṃśchātāḍayattathā

बलवान, दुरात्म्या असुरांचे ते सर्व सैन्य कालीने तुडवले; काहींचे भक्षण केले आणि काहींना मारले.

काली ने बलवान एवं दुरात्मा दैत्यों की वह सारी सेना रौंद डाली, कितनों को खा गईं और कितनों को मार भगाया।

The whole army of those mighty, evil-souled asuras she crushed; some she devoured, and others she struck down.

असिना निहताः केचित्केचित्खट्वाङ्गताडिताः ।
जग्मुर्विनाशमसुरा दन्ताग्राभिहतास्तथा ॥ १५ ॥

asinā nihatāḥ kechitkechitkhaṭvāṅgatāḍitāḥ |
jagmurvināśamasurā dantāgrābhihatāstathā

काही खड्गाने मारले गेले, काही खट्वांगाने बडवले गेले, आणि कितीतरी असुर दातांच्या टोकांनी चिरडून नाश पावले.

कोई तलवार के घाट उतारे गए, कोई खट्वांग से पीटे गए और कितने ही असुर दाँतों के अग्रभाग से कुचले जाकर मृत्यु को प्राप्त हुए।

Some were slain with her sword, some struck with her skull-staff; and so the asuras perished, struck too by the points of her teeth.

क्षणेन तद्बलं सर्वमसुराणां निपातितम् ।
दृष्ट्वा चण्डोऽभिदुद्राव तां कालीमतिभीषणाम् ॥ १६ ॥

kṣaṇena tadbalaṃ sarvamasurāṇāṃ nipātitam |
dṛṣṭvā chaṇḍo'bhidudrāva tāṃ kālīmatibhīṣaṇām

असुरांचे ते सर्व सैन्य क्षणात पडलेले पाहून चंड त्या अत्यंत भयानक कालीकडे धावला.

इस प्रकार देवी ने असुरों की उस सारी सेना को क्षणभर में मार गिराया। यह देख चण्ड उन अत्यन्त भयानक कालीदेवी की ओर दौड़ा।

Seeing that whole army of the asuras felled in a moment, Caṇḍa rushed at that most terrifying Kālī.

शरवर्षैर्महाभीमैर्भीमाक्षीं तां महासुरः ।
छादयामास चक्रैश्च मुण्डः क्षिप्तैः सहस्रशः ॥ १७ ॥

śaravarṣairmahābhīmairbhīmākṣīṃ tāṃ mahāsuraḥ |
chhādayāmāsa chakraiścha muṇḍaḥ kṣiptaiḥ sahasraśaḥ

आणि महासुराने अतिशय भयंकर बाणांच्या वर्षावाने, तर मुंडाने हजारो वेळा फेकलेल्या चक्रांनी त्या भयानक नेत्रांच्या देवीला झाकून टाकले.

तथा महादैत्य मुण्ड ने भी अत्यन्त भयंकर बाणों की वर्षा से तथा हजारों बार चलाए हुए चक्रों से उन भयानक नेत्रों वाली देवी को आच्छादित कर दिया।

The great asura covered the terrible-eyed one with showers of most fearsome arrows, and Muṇḍa with discuses hurled by the thousand.

तानि चक्राण्यनेकानि विशमानानि तन्मुखम् ।
बभुर्यथार्कबिम्बानि सुबहूनि घनोदरम् ॥ १८ ॥

tāni chakrāṇyanekāni viśamānāni tanmukham |
babhuryathārkabimbāni subahūni ghanodaram

ती अनेक चक्रे तिच्या मुखात शिरताना जणू पुष्कळ सूर्यबिंबे मेघाच्या पोटात शिरत आहेत असे दिसत होते.

वे अनेकों चक्र देवी के मुख में समाते हुए ऐसे जान पड़े, मानो सूर्य के बहुतेरे मण्डल बादलों के उदर में प्रवेश कर रहे हों।

Those many discuses, entering her mouth, looked like many suns sinking into the belly of a cloud.

ततो जहासातिरुषा भीमं भैरवनादिनी ।
काली करालवक्त्रान्तर्दुर्दर्शदशनोज्ज्वला ॥ १९ ॥

tato jahāsātiruṣā bhīmaṃ bhairavanādinī |
kālī karālavaktrāntardurdarśadaśanojjvalā

तेव्हा भयंकर गर्जना करणारी काली अतिशय रागाने भीषण हसली; तिच्या विक्राळ मुखात न पाहवणारे दात चमकत होते.

तब भयंकर गर्जना करने वाली काली ने अत्यन्त रोष में भरकर बड़े जोर से अट्टहास किया। उस समय उनके विकराल मुख के भीतर कठिनता से देखे जा सकने वाले दाँतों की प्रभा से वे अत्यन्त उज्ज्वल दिखाई देती थीं।

Then Kālī, roaring terribly, laughed a fearsome laugh in her great fury, her dreadful teeth gleaming within her terrible mouth.

उत्थाय च महासिं हं देवी चण्डमधावत ।
गृहीत्वा चास्य केशेषु शिरस्तेनासिनाच्छिनत् ॥ २० ॥

utthāya cha mahāsiṃ haṃ devī chaṇḍamadhāvata |
gṛhītvā chāsya keśeṣu śirastenāsināchchhinat

देवीने मोठे खड्ग उगारून ‘हं’ असा नाद करत चंडावर धाव घेतली आणि त्याचे केस धरून त्याच खड्गाने त्याचे मस्तक छाटले.

देवी ने बहुत बड़ी तलवार उठाकर ‘हं’ का उच्चारण करते हुए चण्ड पर धावा किया और उसके केश पकड़कर उसी तलवार से उसका मस्तक काट डाला।

Raising her great sword with a cry of ‘haṃ’, the Goddess rushed at Caṇḍa, seized him by the hair, and with that sword cut off his head.

Note

Some printings read महासिंहं, ‘[mounting] the great lion’; the Gita Press printing has महासिं हं, ‘the great sword, [crying] haṃ’, which fits ‘that sword’ in the next line.

अथ मुण्डोऽभ्यधावत्तां दृष्ट्वा चण्डं निपातितम् ।
तमप्यपातयद् भूमौ सा खड्गाभिहतं रुषा ॥ २१ ॥

atha muṇḍo'bhyadhāvattāṃ dṛṣṭvā chaṇḍaṃ nipātitam |
tamapyapātayad bhūmau sā khaḍgābhihataṃ ruṣā

चंड पडलेला पाहून मुंड तिच्यावर धावला; तेव्हा तिने रागाने त्यालाही खड्गाने मारून जमिनीवर पाडले.

चण्ड को मारा गया देखकर मुण्ड भी देवी की ओर दौड़ा। तब देवी ने रोष में भरकर उसे भी तलवार से घायल करके धरती पर सुला दिया।

Then Muṇḍa, seeing Caṇḍa fallen, rushed at her; and she, in her fury, struck him down to the ground with her sword.

हतशेषं ततः सैन्यं दृष्ट्वा चण्डं निपातितम् ।
मुण्डं च सुमहावीर्यं दिशो भेजे भयातुरम् ॥ २२ ॥

hataśeṣaṃ tataḥ sainyaṃ dṛṣṭvā chaṇḍaṃ nipātitam |
muṇḍaṃ cha sumahāvīryaṃ diśo bheje bhayāturam

महापराक्रमी चंड आणि मुंड पडलेले पाहून उरलेले सैन्य भयाने व्याकूळ होऊन चहूकडे पळाले.

महापराक्रमी चण्ड और मुण्ड को मारा गया देख मरने से बची हुई बाकी सेना भय से व्याकुल हो चारों ओर भाग गई।

Seeing Caṇḍa fallen, and Muṇḍa of great valour too, what was left of the army fled in all directions, stricken with fear.

शिरश्चण्डस्य काली च गृहीत्वा मुण्डमेव च ।
प्राह प्रचण्डाट्टहासमिश्रमभ्येत्य चण्डिकाम् ॥ २३ ॥

śiraśchaṇḍasya kālī cha gṛhītvā muṇḍameva cha |
prāha prachaṇḍāṭṭahāsamiśramabhyetya chaṇḍikām

मग कालीने चंड आणि मुंड यांची मस्तके हातात घेऊन चंडिकेकडे जाऊन प्रचंड अट्टहास करत म्हटले:

तदनन्तर काली ने चण्ड और मुण्ड का मस्तक हाथ में ले चण्डिका के पास जाकर प्रचण्ड अट्टहास करते हुए कहा:

And Kālī, taking the head of Caṇḍa and of Muṇḍa too, went to Caṇḍikā and said, with a fierce laugh:

मया तवात्रोपहृतौ चण्डमुण्डौ महापशू ।
युद्धयज्ञे स्वयं शुम्भं निशुम्भं च हनिष्यसि ॥ २४ ॥

mayā tavātropahṛtau chaṇḍamuṇḍau mahāpaśū |
yuddhayajñe svayaṃ śumbhaṃ niśumbhaṃ cha haniṣyasi

हे देवी, चंड आणि मुंड हे दोन महापशू मी तुला येथे अर्पण केले आहेत. आता युद्धयज्ञात तू स्वतःच शुंभ आणि निशुंभाचा वध करशील.

देवि! मैंने चण्ड और मुण्ड नामक इन दो महापशुओं को तुम्हें भेंट किया है। अब युद्धयज्ञ में तुम शुम्भ और निशुम्भ का स्वयं ही वध करना।

I have brought you here Caṇḍa and Muṇḍa, two great beasts [for the offering]. In the sacrifice of battle you yourself shall slay Śumbha and Niśumbha.

ऋषिरुवाच ॥ २५ ॥ṛṣiruvāchaऋषी म्हणाले:ऋषि बोले:The sage said:

तावानीतौ ततो दृष्ट्वा चण्डमुण्डौ महासुरौ ।
उवाच कालीं कल्याणी ललितं चण्डिका वचः ॥ २६ ॥

tāvānītau tato dṛṣṭvā chaṇḍamuṇḍau mahāsurau |
uvācha kālīṃ kalyāṇī lalitaṃ chaṇḍikā vachaḥ

आणलेले ते चंड-मुंड महासुर पाहून कल्याणी चंडिकेने कालीला मधुर वाणीने म्हटले:

वहाँ लाए हुए उन चण्ड-मुण्ड नामक महादैत्यों को देखकर कल्याणमयी चण्डी ने काली से मधुर वाणी में कहा:

Seeing the two great asuras, Caṇḍa and Muṇḍa, brought before her, the auspicious Caṇḍikā spoke gently to Kālī:

यस्माच्चण्डं च मुण्डं च गृहीत्वा त्वमुपागता ।
चामुण्डेति ततो लोके ख्याता देवि भविष्यसि ॥ ॐ ॥ २७ ॥

yasmāchchaṇḍaṃ cha muṇḍaṃ cha gṛhītvā tvamupāgatā |
chāmuṇḍeti tato loke khyātā devi bhaviṣyasi || oṃ

हे देवी, तू चंड आणि मुंड यांना घेऊन माझ्याकडे आलीस, म्हणून जगात ‘चामुंडा’ या नावाने तुझी ख्याती होईल.

देवि! तुम चण्ड और मुण्ड को लेकर मेरे पास आई हो, इसलिए संसार में चामुण्डा के नाम से तुम्हारी ख्याति होगी।

Because you have taken Caṇḍa and Muṇḍa and brought them here, you shall be famed in the world as Cāmuṇḍā, Goddess.

इति श्रीमार्कण्डेयपुराणे सावर्णिके मन्वन्तरे देवीमाहात्म्ये चण्डमुण्डवधो नाम सप्तमोऽध्यायः ॥ ७ ॥iti śrīmārkaṇḍeyapurāṇe sāvarṇike manvantare devīmāhātmye chaṇḍamuṇḍavadho nāma saptamo'dhyāyaḥ || 7 ||

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