श्लोकपाठShlokpath

तृतीयोऽध्यायः

महिषासुरवधः

Mahiṣāsuravadhaḥ

Chapter 3: The slaying of Mahiṣāsura

  • Durgā Saptaśatī
  • The middle episode · Mahālakṣmī
  • 44 mantras

The Goddess slays Mahiṣa’s generals, Cikṣura, Cāmara and the rest, and then Mahiṣāsura himself, who changes from buffalo to lion to man to elephant and back before she cuts him down.

Meaning
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ध्यानम्

ॐ उद्यद्भानुसहस्रकान्तिमरुणक्षौमां शिरोमालिकां
रक्तालिप्तपयोधरां जपवटीं विद्यामभीतिं वरम् ।
हस्ताब्जैर्दधतीं त्रिनेत्रविलसद्वक्त्रारविन्दश्रियं
देवीं बद्धहिमांशुरत्नमुकुटां वन्देऽरविन्दस्थिताम्

oṃ udyadbhānusahasrakāntimaruṇakṣaumāṃ śiromālikāṃ
raktāliptapayodharāṃ japavaṭīṃ vidyāmabhītiṃ varam |
hastābjairdadhatīṃ trinetravilasadvaktrāravindaśriyaṃ
devīṃ baddhahimāṃśuratnamukuṭāṃ vande'ravindasthitām

ॐ जिची कांती उगवत्या सहस्र सूर्यांसारखी आहे, जी लाल रेशमी वस्त्र आणि मुंडमाळा धारण करते, जिच्या स्तनांवर रक्तचंदनाचा लेप आहे, जी करकमलांत जपमाळ, विद्या (ग्रंथ), अभय आणि वर मुद्रा धारण करते, त्रिनेत्रांनी जिचे मुखकमल शोभते, जिच्या रत्नमुकुटात चंद्र बांधलेला आहे आणि जी कमलासनावर आहे, त्या देवीला मी वंदन करतो.

ॐ जिनके शरीर की कान्ति उदय होते हुए हजारों सूर्यों के समान है, जो लाल रेशमी वस्त्र और मुण्डमाला धारण करती हैं, जिनके स्तनों पर रक्तचन्दन का लेप है, जो अपने करकमलों में जपमाला, विद्या (पुस्तक), अभय और वर मुद्राएँ धारण करती हैं, तीन नेत्रों से जिनका मुखकमल सुशोभित है, जिनके रत्नमुकुट में चन्द्रमा बँधा है और जो कमल के आसन पर विराजमान हैं, उन देवी को मैं प्रणाम करता हूँ।

Om. I bow to the Goddess seated on a lotus, radiant as a thousand rising suns, in red silk, wearing a garland of heads, her breasts smeared with red; who holds in her lotus hands a rosary, a book, and the gestures of fearlessness and of boon-giving; whose lotus face shines with three eyes, and whose jewelled crown is bound with the moon.

ॐ ऋषिरुवाच ॥ १ ॥oṃ ṛṣiruvāchaॐ ऋषी म्हणाले:ॐ ऋषि बोले:Om. The sage said:

निहन्यमानं तत्सैन्यमवलोक्य महासुरः ।
सेनानीश्चिक्षुरः कोपाद्ययौ योद्धुमथाम्बिकाम् ॥ २ ॥

nihanyamānaṃ tatsainyamavalokya mahāsuraḥ |
senānīśchikṣuraḥ kopādyayau yoddhumathāmbikām

आपल्या सैन्याचा असा संहार होताना पाहून महादैत्य सेनापती चिक्षुर क्रोधाने अंबिकेशी लढण्यासाठी पुढे आला.

दैत्यों की सेना को इस प्रकार तहस-नहस होते देख महादैत्य सेनापति चिक्षुर क्रोध में भरकर अम्बिका देवी से युद्ध करने के लिए आगे बढ़ा।

Seeing his army being slaughtered, the great demon Cikṣura, the general, went out in anger to fight Ambikā.

स देवीं शरवर्षेण ववर्ष समरेऽसुरः ।
यथा मेरुगिरेः शृङ्गं तोयवर्षेण तोयदः ॥ ३ ॥

sa devīṃ śaravarṣeṇa vavarṣa samare'suraḥ |
yathā merugireḥ śṛṅgaṃ toyavarṣeṇa toyadaḥ

तो असुर रणांगणात देवीवर असा बाणांचा वर्षाव करू लागला, जसा मेघ मेरुपर्वताच्या शिखरावर पाऊस पाडतो.

वह असुर रणभूमि में देवी के ऊपर इस प्रकार बाणों की वर्षा करने लगा, जैसे बादल मेरुगिरि के शिखर पर पानी की धार बरसा रहा हो।

In the battle that demon rained a shower of arrows on the Goddess, as a cloud pours rain on the peak of Mount Meru.

तस्य च्छित्त्वा ततो देवी लीलयैव शरोत्करान् ।
जघान तुरगान् बाणैर्यन्तारं चैव वाजिनाम् ॥ ४ ॥

tasya chchhittvā tato devī līlayaiva śarotkarān |
jaghāna turagān bāṇairyantāraṃ chaiva vājinām

तेव्हा देवीने खेळातच त्याचे बाणसमूह छाटून आपल्या बाणांनी त्याचे घोडे आणि सारथी मारले.

तब देवी ने अपने बाणों से उसके बाणसमूह को अनायास ही काटकर उसके घोड़ों और सारथि को भी मार डाला।

Then the Goddess, as if in play, cut down his volleys of arrows, and with her arrows killed his horses and their driver.

चिच्छेद च धनुः सद्यो ध्वजं चातिसमुच्छ्रितम् ।
विव्याध चैव गात्रेषु छिन्नधन्वानमाशुगैः ॥ ५ ॥

chichchheda cha dhanuḥ sadyo dhvajaṃ chātisamuchchhritam |
vivyādha chaiva gātreṣu chhinnadhanvānamāśugaiḥ

त्याचबरोबर त्याचे धनुष्य आणि अतिशय उंच ध्वज तत्काळ छाटला, आणि धनुष्यहीन झालेल्या त्याच्या अंगांना वेगवान बाणांनी विंधले.

साथ ही उसके धनुष तथा अत्यन्त ऊँची ध्वजा को भी तत्काल काट गिराया। धनुष कट जाने पर उसके अंगों को अपने बाणों से बींध डाला।

At once she cut his bow and his tall banner, and pierced the limbs of the bowless demon with her swift arrows.

स च्छिन्नधन्वा विरथो हताश्वो हतसारथिः ।
अभ्यधावत तां देवीं खड्गचर्मधरोऽसुरः ॥ ६ ॥

sa chchhinnadhanvā viratho hatāśvo hatasārathiḥ |
abhyadhāvata tāṃ devīṃ khaḍgacharmadharo'suraḥ

धनुष्य, रथ, घोडे आणि सारथी नष्ट झाल्यावर तो असुर ढाल-तलवार घेऊन देवीकडे धावला.

धनुष, रथ, घोड़े और सारथि के नष्ट हो जाने पर वह असुर ढाल और तलवार लेकर देवी की ओर दौड़ा।

His bow cut, his chariot gone, his horses and charioteer killed, the demon ran at the Goddess with sword and shield.

सिंहमाहत्य खड्गेन तीक्ष्णधारेण मूर्धनि ।
आजघान भुजे सव्ये देवीमप्यतिवेगवान् ॥ ७ ॥

siṃhamāhatya khaḍgena tīkṣṇadhāreṇa mūrdhani |
ājaghāna bhuje savye devīmapyativegavān

त्याने तीक्ष्ण धारेच्या तलवारीने सिंहाच्या मस्तकावर प्रहार केला आणि मोठ्या वेगाने देवीच्या डाव्या बाहूवरही वार केला.

उसने तीखी धार वाली तलवार से सिंह के मस्तक पर चोट करके बड़े वेग से देवी की भी बाईं भुजा पर प्रहार किया।

Swiftly he struck the lion on the head with his sharp-edged sword, and struck the Goddess too, on her left arm.

तस्याः खड्गो भुजं प्राप्य पफाल नृपनन्दन ।
ततो जग्राह शूलं स कोपादरुणलोचनः ॥ ८ ॥

tasyāḥ khaḍgo bhujaṃ prāpya paphāla nṛpanandana |
tato jagrāha śūlaṃ sa kopādaruṇalochanaḥ

हे राजपुत्रा, देवीच्या बाहूवर पोहोचताच ती तलवार तुटली. मग क्रोधाने लाल डोळे करून त्याने शूळ हातात घेतला

राजकुमार! देवी की बाँह पर पहुँचते ही वह तलवार टूट गई। तब क्रोध से लाल आँखें करके उस राक्षस ने शूल हाथ में लिया

His sword, striking her arm, shattered, O son of a king. Then, his eyes red with anger, he took up a spear,

चिक्षेप च ततस्तत्तु भद्रकाल्यां महासुरः ।
जाज्वल्यमानं तेजोभी रविबिम्बमिवाम्बरात् ॥ ९ ॥

chikṣepa cha tatastattu bhadrakālyāṃ mahāsuraḥ |
jājvalyamānaṃ tejobhī ravibimbamivāmbarāt

आणि त्या महादैत्याने तो भद्रकालीवर फेकला. आकाशातून पडणाऱ्या सूर्यबिंबासारखा तो तेजाने झळाळत होता.

और उसे उस महादैत्य ने भद्रकाली पर चलाया। वह शूल आकाश से गिरते हुए सूर्यमण्डल के समान अपने तेज से प्रज्वलित हो उठा।

and the great demon hurled it at Bhadrakālī, blazing with radiance like the sun’s disc falling from the sky.

दृष्ट्वा तदापतच्छूलं देवी शूलममुञ्चत ।
तच्छूलं शतधा तेन नीतं स च महासुरः ॥ १० ॥

dṛṣṭvā tadāpatachchhūlaṃ devī śūlamamuñchata |
tachchhūlaṃ śatadhā tena nītaṃ sa cha mahāsuraḥ

तो शूळ येताना पाहून देवीनेही शूळ सोडला. त्याने त्या शूळाचे शंभर तुकडे झाले, आणि तो महादैत्यही [मारला गेला].

उस शूल को अपनी ओर आते देख देवी ने भी शूल चलाया। उससे राक्षस के शूल के सैकड़ों टुकड़े हो गए, साथ ही महादैत्य चिक्षुर की भी धज्जियाँ उड़ गईं।

Seeing that spear coming, the Goddess loosed her own spear; it broke his spear into a hundred pieces, and the great demon [too was slain].

हते तस्मिन् महावीर्ये महिषस्य चमूपतौ ।
आजगाम गजारूढश्चामरस्त्रिदशार्दनः ॥ ११ ॥

hate tasmin mahāvīrye mahiṣasya chamūpatau |
ājagāma gajārūḍhaśchāmarastridaśārdanaḥ

महिषासुराचा तो महापराक्रमी सेनापती मारला गेल्यावर देवांना पीडा देणारा चामर हत्तीवर बसून आला.

महिषासुर के महापराक्रमी सेनापति के मारे जाने पर देवताओं को पीड़ा देने वाला चामर हाथी पर चढ़कर आया।

When that mighty general of Mahiṣa had been slain, Cāmara, tormentor of the gods, came riding on an elephant.

सोऽपि शक्तिं मुमोचाथ देव्यास्तामम्बिका द्रुतम् ।
हुङ्काराभिहतां भूमौ पातयामास निष्प्रभाम् ॥ १२ ॥

so'pi śaktiṃ mumochātha devyāstāmambikā drutam |
huṅkārābhihatāṃ bhūmau pātayāmāsa niṣprabhām

त्यानेही देवीवर शक्ती फेकली, पण अंबिकेने ‘हुं’काराने तिला आहत करून निस्तेज करून तत्काळ जमिनीवर पाडले.

उसने भी देवी के ऊपर शक्ति का प्रहार किया, किन्तु जगदम्बा ने उसे अपने हुंकार से आहत एवं निष्प्रभ करके तत्काल पृथ्वी पर गिरा दिया।

He too hurled a spear at the Goddess; Ambikā swiftly struck it down with a roar of ‘huṃ’, and it fell to the ground, lifeless.

भग्नां शक्तिं निपतितां दृष्ट्वा क्रोधसमन्वितः ।
चिक्षेप चामरः शूलं बाणैस्तदपि साच्छिनत् ॥ १३ ॥

bhagnāṃ śaktiṃ nipatitāṃ dṛṣṭvā krodhasamanvitaḥ |
chikṣepa chāmaraḥ śūlaṃ bāṇaistadapi sāchchhinat

शक्ती तुटून पडलेली पाहून चामराला मोठा क्रोध आला; त्याने शूळ फेकला, पण देवीने तोही बाणांनी छाटला.

शक्ति टूटकर गिरी हुई देख चामर को बड़ा क्रोध हुआ। अब उसने शूल चलाया, किन्तु देवी ने उसे भी अपने बाणों द्वारा काट डाला।

Seeing his spear broken and fallen, Cāmara, full of anger, hurled a trident; and that too she cut down with her arrows.

ततः सिंहः समुत्पत्य गजकुम्भान्तरे स्थितः ।
बाहुयुद्धेन युयुधे तेनोच्चैस्त्रिदशारिणा ॥ १४ ॥

tataḥ siṃhaḥ samutpatya gajakumbhāntare sthitaḥ |
bāhuyuddhena yuyudhe tenochchaistridaśāriṇā

इतक्यात देवीचा सिंह उडी मारून हत्तीच्या गंडस्थळांमध्ये जाऊन बसला आणि त्या देवशत्रूशी जोराने बाहुयुद्ध करू लागला.

इतने में ही देवी का सिंह उछलकर हाथी के मस्तक पर चढ़ बैठा और उस दैत्य के साथ खूब जोर लगाकर बाहुयुद्ध करने लगा।

Then the lion leapt up and, standing between the elephant’s temples, fought hand to hand with that enemy of the gods.

युध्यमानौ ततस्तौ तु तस्मान्नागान्महीं गतौ ।
युयुधातेऽतिसंरब्धौ प्रहारैरतिदारुणैः ॥ १५ ॥

yudhyamānau tatastau tu tasmānnāgānmahīṃ gatau |
yuyudhāte'tisaṃrabdhau prahārairatidāruṇaiḥ

लढता लढता ते दोघे हत्तीवरून जमिनीवर आले आणि अतिशय क्रोधाने एकमेकांवर भयंकर प्रहार करत लढू लागले.

वे दोनों लड़ते-लड़ते हाथी से पृथ्वी पर आ गए और अत्यन्त क्रोध में भरकर एक-दूसरे पर बड़े भयंकर प्रहार करते हुए लड़ने लगे।

Fighting, the two fell from the elephant to the ground, and fought on in fury with the most terrible blows.

ततो वेगात्खमुत्पत्य निपत्य च मृगारिणा ।
करप्रहारेण शिरश्चामरस्य पृथक्कृतम् ॥ १६ ॥

tato vegātkhamutpatya nipatya cha mṛgāriṇā |
karaprahāreṇa śiraśchāmarasya pṛthakkṛtam

मग सिंह मोठ्या वेगाने आकाशात उसळला आणि खाली येताना पंजाच्या प्रहाराने त्याने चामराचे मस्तक धडापासून वेगळे केले.

तदनन्तर सिंह बड़े वेग से आकाश की ओर उछला और उधर से गिरते समय उसने पंजों की मार से चामर का सिर धड़ से अलग कर दिया।

Then the lion, leaping swiftly into the sky and dropping down, severed Cāmara’s head with a blow of his paw.

उदग्रश्च रणे देव्या शिलावृक्षादिभिर्हतः ।
दन्तमुष्टितलैश्चैव करालश्च निपातितः ॥ १७ ॥

udagraścha raṇe devyā śilāvṛkṣādibhirhataḥ |
dantamuṣṭitalaiśchaiva karālaścha nipātitaḥ

त्याचप्रमाणे देवीने युद्धात शिळा, वृक्ष इत्यादींनी उदग्राला मारले, आणि दात, मुठी व थपडांनी करालाला लोळवले.

इसी प्रकार उदग्र भी शिला और वृक्ष आदि की मार खाकर रणभूमि में देवी के हाथ से मारा गया, तथा कराल भी दाँतों, मुक्कों और थप्पड़ों की चोट से धराशायी हो गया।

In the battle the Goddess killed Udagra with stones, trees and the like, and felled Karāla with her teeth, fists and palms.

देवी क्रुद्धा गदापातैश्चूर्णयामास चोद्धतम् ।
बाष्कलं भिन्दिपालेन बाणैस्ताम्रं तथान्धकम् ॥ १८ ॥

devī kruddhā gadāpātaiśchūrṇayāmāsa choddhatam |
bāṣkalaṃ bhindipālena bāṇaistāmraṃ tathāndhakam

क्रुद्ध देवीने गदेच्या आघातांनी उद्धताचा चुराडा केला, भिंदिपालाने बाष्कलाला आणि बाणांनी ताम्र व अंधक यांना मारले.

क्रोध में भरी हुई देवी ने गदा की चोट से उद्धत का कचूमर निकाल डाला, भिन्दिपाल से बाष्कल को तथा बाणों से ताम्र और अन्धक को मौत के घाट उतार दिया।

In anger the Goddess crushed Uddhata with blows of her mace, Bāṣkala with a javelin, and Tāmra and Andhaka with arrows.

उग्रास्यमुग्रवीर्यं च तथैव च महाहनुम् ।
त्रिनेत्रा च त्रिशूलेन जघान परमेश्वरी ॥ १९ ॥

ugrāsyamugravīryaṃ cha tathaiva cha mahāhanum |
trinetrā cha triśūlena jaghāna parameśvarī

त्रिनेत्रा परमेश्वरीने त्रिशूळाने उग्रास्य, उग्रवीर्य आणि महाहनू यांना मारले.

तीन नेत्रों वाली परमेश्वरी ने त्रिशूल से उग्रास्य, उग्रवीर्य तथा महाहनु नामक दैत्यों को मार डाला।

And the three-eyed supreme Goddess slew Ugrāsya, Ugravīrya and Mahāhanu with her trident.

बिडालस्यासिना कायात् पातयामास वै शिरः ।
दुर्धरं दुर्मुखं चोभौ शरैर्निन्ये यमक्षयम् ॥ २० ॥

biḍālasyāsinā kāyāt pātayāmāsa vai śiraḥ |
durdharaṃ durmukhaṃ chobhau śarairninye yamakṣayam

खड्गाने बिडालाचे मस्तक धडापासून वेगळे केले, आणि दुर्धर व दुर्मुख या दोघांनाही बाणांनी यमलोकी पाठवले.

तलवार की चोट से बिडाल के मस्तक को धड़ से काट गिराया। दुर्धर और दुर्मुख, इन दोनों को भी अपने बाणों से यमलोक भेज दिया।

With her sword she struck Biḍāla’s head from his body, and with her arrows sent both Durdhara and Durmukha to the abode of Yama.

एवं संक्षीयमाणे तु स्वसैन्ये महिषासुरः ।
माहिषेण स्वरूपेण त्रासयामास तान् गणान् ॥ २१ ॥

evaṃ saṃkṣīyamāṇe tu svasainye mahiṣāsuraḥ |
māhiṣeṇa svarūpeṇa trāsayāmāsa tān gaṇān

अशा प्रकारे आपल्या सैन्याचा संहार होत असताना महिषासुराने रेड्याचे रूप धारण करून देवीच्या गणांना त्रास देणे सुरू केले.

इस प्रकार अपनी सेना का संहार होता देख महिषासुर ने भैंसे का रूप धारण करके देवी के गणों को त्रास देना आरम्भ किया।

As his army was thus being destroyed, Mahiṣāsura terrified the Goddess’s attendants in his own buffalo form.

कांश्चित्तुण्डप्रहारेण खुरक्षेपैस्तथापरान् ।
लाङ्गूलताडितांश्चान्यान् शृङ्गाभ्यां च विदारितान् ॥ २२ ॥

kāṃśchittuṇḍaprahāreṇa khurakṣepaistathāparān |
lāṅgūlatāḍitāṃśchānyān śṛṅgābhyāṃ cha vidāritān

काहींना मुसकटीच्या प्रहाराने, काहींना खुरांच्या आघाताने, काहींना शेपटीच्या फटक्याने, काहींना शिंगांनी फाडून,

किन्हीं को थूथुन से मारकर, किन्हीं के ऊपर खुरों का प्रहार करके, किन्हीं-किन्हीं को पूँछ से चोट पहुँचाकर, कुछ को सींगों से विदीर्ण करके,

Some he felled with blows of his muzzle, others by stamping his hooves, others lashed by his tail, others torn by his horns;

वेगेन कांश्चिदपरान् नादेन भ्रमणेन च ।
निःश्वासपवनेनान्यान् पातयामास भूतले ॥ २३ ॥

vegena kāṃśchidaparān nādena bhramaṇena cha |
niḥśvāsapavanenānyān pātayāmāsa bhūtale

काहींना वेगाने, काहींना गर्जना आणि गिरक्यांनी, तर काहींना श्वासाच्या झोताने त्याने जमिनीवर पाडले.

कुछ गणों को वेग से, किन्हीं को गर्जना और चक्कर देकर, और कुछ को निःश्वास के झोंके से धराशायी कर दिया।

some by his speed, others by his roar and his wheeling, and others by the blast of his breath he threw to the ground.

निपात्य प्रमथानीकमभ्यधावत सोऽसुरः ।
सिंहं हन्तुं महादेव्याः कोपं चक्रे ततोऽम्बिका ॥ २४ ॥

nipātya pramathānīkamabhyadhāvata so'suraḥ |
siṃhaṃ hantuṃ mahādevyāḥ kopaṃ chakre tato'mbikā

गणांच्या सैन्याला पाडून तो असुर महादेवीच्या सिंहाला मारण्यासाठी धावला. तेव्हा अंबिकेला क्रोध आला.

इस प्रकार गणों की सेना को गिराकर वह असुर महादेवी के सिंह को मारने के लिए झपटा। इससे जगदम्बा को बड़ा क्रोध हुआ।

Having felled the army of the attendants, the demon ran to kill the great Goddess’s lion. Then Ambikā grew angry.

सोऽपि कोपान्महावीर्यः खुरक्षुण्णमहीतलः ।
शृङ्गाभ्यां पर्वतानुच्चांश्चिक्षेप च ननाद च ॥ २५ ॥

so'pi kopānmahāvīryaḥ khurakṣuṇṇamahītalaḥ |
śṛṅgābhyāṃ parvatānuchchāṃśchikṣepa cha nanāda cha

तो महापराक्रमी महिषासुरही क्रोधाने खुरांनी पृथ्वी खणू लागला, शिंगांनी उंच पर्वत उचलून फेकू लागला आणि गर्जू लागला.

उधर महापराक्रमी महिषासुर भी क्रोध में भरकर धरती को खुरों से खोदने लगा तथा अपने सींगों से ऊँचे-ऊँचे पर्वतों को उठाकर फेंकने और गर्जने लगा।

He too, of great might, in his fury pounded the earth with his hooves, tossed high mountains with his horns, and roared.

वेगभ्रमणविक्षुण्णा मही तस्य व्यशीर्यत ।
लाङ्गूलेनाहतश्चाब्धिः प्लावयामास सर्वतः ॥ २६ ॥

vegabhramaṇavikṣuṇṇā mahī tasya vyaśīryata |
lāṅgūlenāhataśchābdhiḥ plāvayāmāsa sarvataḥ

त्याच्या वेगवान गिरक्यांनी चिरडलेली पृथ्वी फाटू लागली, आणि त्याच्या शेपटीच्या फटक्याने समुद्र चहूकडे पसरू लागला.

उसके वेग से चक्कर देने के कारण पृथ्वी क्षुब्ध होकर फटने लगी। उसकी पूँछ से टकराकर समुद्र सब ओर से धरती को डुबोने लगा।

The earth, crushed by his rushing and wheeling, broke apart; and the ocean, lashed by his tail, flooded all around.

धुतशृङ्गविभिन्नाश्च खण्डं खण्डं ययुर्घनाः ।
श्वासानिलास्ताः शतशो निपेतुर्नभसोऽचलाः ॥ २७ ॥

dhutaśṛṅgavibhinnāścha khaṇḍaṃ khaṇḍaṃ yayurghanāḥ |
śvāsānilāstāḥ śataśo nipeturnabhaso'chalāḥ

हलणाऱ्या शिंगांच्या आघाताने ढगांचे तुकडे तुकडे झाले, आणि त्याच्या श्वासाच्या प्रचंड वाऱ्याने उडालेले शेकडो पर्वत आकाशातून कोसळू लागले.

हिलते हुए सींगों के आघात से विदीर्ण होकर बादलों के टुकड़े-टुकड़े हो गए। उसके श्वास की प्रचण्ड वायु के वेग से उड़े हुए सैकड़ों पर्वत आकाश से गिरने लगे।

Torn by his tossing horns, the clouds broke into pieces; flung by the wind of his breath, mountains fell from the sky by the hundred.

इति क्रोधसमाध्मातमापतन्तं महासुरम् ।
दृष्ट्वा सा चण्डिका कोपं तद्वधाय तदाकरोत् ॥ २८ ॥

iti krodhasamādhmātamāpatantaṃ mahāsuram |
dṛṣṭvā sā chaṇḍikā kopaṃ tadvadhāya tadākarot

क्रोधाने फुगलेल्या त्या महादैत्याला आपल्याकडे येताना पाहून चंडिकेने त्याच्या वधासाठी क्रोध धारण केला.

इस प्रकार क्रोध में भरे हुए उस महादैत्य को अपनी ओर आते देख चण्डिका ने उसका वध करने के लिए महान क्रोध किया।

Seeing the great demon rushing at her, swollen with anger, Caṇḍikā then grew angry to slay him.

सा क्षिप्त्वा तस्य वै पाशं तं बबन्ध महासुरम् ।
तत्याज माहिषं रूपं सोऽपि बद्धो महामृधे ॥ २९ ॥

sā kṣiptvā tasya vai pāśaṃ taṃ babandha mahāsuram |
tatyāja māhiṣaṃ rūpaṃ so'pi baddho mahāmṛdhe

तिने पाश फेकून त्या महासुराला बांधले. त्या महायुद्धात बांधला गेल्यावर त्याने रेड्याचे रूप टाकले.

उन्होंने पाश फेंककर उस महान असुर को बाँध लिया। उस महासंग्राम में बँध जाने पर उसने भैंसे का रूप त्याग दिया।

She threw her noose over him and bound the great demon. Bound in the great battle, he gave up his buffalo form.

ततः सिंहोऽभवत् सद्यो यावत्तस्याम्बिका शिरः ।
छिनत्ति तावत्पुरुषः खड्गपाणिरदृश्यत ॥ ३० ॥

tataḥ siṃho'bhavat sadyo yāvattasyāmbikā śiraḥ |
chhinatti tāvatpuruṣaḥ khaḍgapāṇiradṛśyata

आणि तो तत्काळ सिंह झाला. अंबिका त्याचे मस्तक छाटणार इतक्यात तो हातात खड्ग घेतलेला पुरुष म्हणून दिसू लागला.

और तत्काल सिंह के रूप में प्रकट हो गया। उस अवस्था में जगदम्बा ज्यों ही उसका मस्तक काटने के लिए उद्यत हुईं, त्यों ही वह खड्गधारी पुरुष के रूप में दिखाई देने लगा।

At once he became a lion; and just as Ambikā was cutting off its head, a man appeared, sword in hand.

तत एवाशु पुरुषं देवी चिच्छेद सायकैः ।
तं खड्गचर्मणा सार्धं ततः सोऽभून्महागजः ॥ ३१ ॥

tata evāśu puruṣaṃ devī chichchheda sāyakaiḥ |
taṃ khaḍgacharmaṇā sārdhaṃ tataḥ so'bhūnmahāgajaḥ

तेव्हा देवीने तत्काळ बाणांनी त्या पुरुषाला ढाल-तलवारीसह छेदले. मग तो महागज झाला,

तब देवी ने तुरंत ही बाणों की वर्षा करके ढाल और तलवार के साथ उस पुरुष को बींध डाला। इतने में ही वह महान गजराज के रूप में परिणत हो गया,

At once the Goddess cut down the man with her arrows, together with his sword and shield. Then he became a great elephant,

करेण च महासिंहं तं चकर्ष जगर्ज च ।
कर्षतस्तु करं देवी खड्गेन निरकृन्तत ॥ ३२ ॥

kareṇa cha mahāsiṃhaṃ taṃ chakarṣa jagarja cha |
karṣatastu karaṃ devī khaḍgena nirakṛntata

आणि सोंडेने देवीच्या मोठ्या सिंहाला ओढू लागला आणि गर्जू लागला. ओढत असतानाच देवीने खड्गाने त्याची सोंड कापली.

और अपनी सूँड़ से देवी के विशाल सिंह को खींचने और गर्जने लगा। खींचते समय देवी ने तलवार से उसकी सूँड़ काट डाली।

and with his trunk he dragged at the great lion and trumpeted. But as he dragged, the Goddess cut off his trunk with her sword.

ततो महासुरो भूयो माहिषं वपुरास्थितः ।
तथैव क्षोभयामास त्रैलोक्यं सचराचरम् ॥ ३३ ॥

tato mahāsuro bhūyo māhiṣaṃ vapurāsthitaḥ |
tathaiva kṣobhayāmāsa trailokyaṃ sacharācharam

मग त्या महादैत्याने पुन्हा रेड्याचे रूप घेतले आणि पूर्वीप्रमाणेच चराचरासह त्रैलोक्याला क्षुब्ध करू लागला.

तब उस महादैत्य ने पुनः भैंसे का शरीर धारण कर लिया और पहले की ही भाँति चराचर प्राणियों सहित तीनों लोकों को व्याकुल करने लगा।

Then the great demon took his buffalo shape again, and once more shook the three worlds with all that moves and does not move.

ततः क्रुद्धा जगन्माता चण्डिका पानमुत्तमम् ।
पपौ पुनः पुनश्चैव जहासारुणलोचना ॥ ३४ ॥

tataḥ kruddhā jaganmātā chaṇḍikā pānamuttamam |
papau punaḥ punaśchaiva jahāsāruṇalochanā

तेव्हा क्रुद्ध जगन्माता चंडिका पुनःपुन्हा उत्तम मधु पिऊ लागली आणि लाल डोळ्यांनी हसू लागली.

तब क्रोध में भरी हुई जगन्माता चण्डिका बारंबार उत्तम मधु का पान करने और लाल आँखें करके हँसने लगीं।

Then Caṇḍikā, mother of the world, enraged, drank the finest drink again and again, and laughed, her eyes red.

ननर्द चासुरः सोऽपि बलवीर्यमदोद्धतः ।
विषाणाभ्यां च चिक्षेप चण्डिकां प्रति भूधरान् ॥ ३५ ॥

nanarda chāsuraḥ so'pi balavīryamadoddhataḥ |
viṣāṇābhyāṃ cha chikṣepa chaṇḍikāṃ prati bhūdharān

इकडे बल आणि पराक्रमाच्या मदाने उन्मत्त झालेला तो असुरही गर्जू लागला आणि शिंगांनी चंडिकेवर पर्वत फेकू लागला.

उधर वह बल और पराक्रम के मद से उन्मत्त हुआ राक्षस गर्जने लगा और अपने सींगों से चण्डी के ऊपर पर्वतों को फेंकने लगा।

And the demon too roared, maddened by his strength and might, and hurled mountains at Caṇḍikā with his horns.

सा च तान् प्रहितांस्तेन चूर्णयन्ती शरोत्करैः ।
उवाच तं मदोद्धूतमुखरागाकुलाक्षरम् ॥ ३६ ॥

sā cha tān prahitāṃstena chūrṇayantī śarotkaraiḥ |
uvācha taṃ madoddhūtamukharāgākulākṣaram

तेव्हा देवी त्याने फेकलेल्या पर्वतांचा बाणांनी चुराडा करत त्याला म्हणाली; मधुमदाने तिचे मुख लाल झाले होते आणि शब्द अडखळत होते.

उस समय देवी अपने बाणों के समूहों से उसके फेंके हुए पर्वतों को चूर्ण करती हुई बोलीं। बोलते समय उनका मुख मधु के मद से लाल हो रहा था और वाणी लड़खड़ा रही थी।

And she, crushing with her volleys of arrows the mountains he had hurled, spoke to him, her words thick with the flush of drink on her face:

देव्युवाच ॥ ३७ ॥devyuvāchaदेवी म्हणाली:देवी बोलीं:The Goddess said:

गर्ज गर्ज क्षणं मूढ मधु यावत्पिबाम्यहम् ।
मया त्वयि हतेऽत्रैव गर्जिष्यन्त्याशु देवताः ॥ ३८ ॥

garja garja kṣaṇaṃ mūḍha madhu yāvatpibāmyaham |
mayā tvayi hate'traiva garjiṣyantyāśu devatāḥ

अरे मूढा, मी मधु पिईपर्यंत क्षणभर खूप गर्जून घे. मी तुला येथेच मारल्यावर लवकरच देवही गर्जना करतील.

ओ मूढ़! मैं जब तक मधु पीती हूँ, तब तक तू क्षणभर के लिए खूब गर्ज ले। मेरे हाथ से यहीं तेरी मृत्यु हो जाने पर अब शीघ्र ही देवता भी गर्जना करेंगे।

Roar, roar for a moment, fool, while I drink this wine. When I have slain you right here, the gods will soon be roaring.

ऋषिरुवाच ॥ ३९ ॥ṛṣiruvāchaऋषी म्हणाले:ऋषि बोले:The sage said:

एवमुक्त्वा समुत्पत्य सारूढा तं महासुरम् ।
पादेनाक्रम्य कण्ठे च शूलेनैनमताडयत् ॥ ४० ॥

evamuktvā samutpatya sārūḍhā taṃ mahāsuram |
pādenākramya kaṇṭhe cha śūlenainamatāḍayat

असे म्हणून देवी उसळली आणि त्या महादैत्यावर आरूढ झाली. मग पायाने त्याची मान दाबून तिने शूळाने त्याच्यावर प्रहार केला.

यों कहकर देवी उछलीं और उस महादैत्य के ऊपर चढ़ गईं। फिर अपने पैर से उसे दबाकर उन्होंने शूल से उसके कण्ठ में आघात किया।

So saying, she leapt up and mounted the great demon, pressed him down with her foot on his neck, and struck him with her spear.

ततः सोऽपि पदाक्रान्तस्तया निजमुखात्ततः ।
अर्धनिष्क्रान्त एवासीद् देव्या वीर्येण संवृतः ॥ ४१ ॥

tataḥ so'pi padākrāntastayā nijamukhāttataḥ |
ardhaniṣkrānta evāsīd devyā vīryeṇa saṃvṛtaḥ

तिच्या पायाखाली दबलेला असूनही तो आपल्या मुखातून [दुसऱ्या रूपात बाहेर येऊ लागला], पण देवीच्या प्रभावाने तो अर्धाच बाहेर येऊ शकला.

उनके पैर से दबा होने पर भी महिषासुर अपने मुख से [दूसरे रूप में बाहर होने लगा], पर देवी के प्रभाव से घिरकर वह आधा ही निकल पाया।

Then, pressed under her foot, he came only halfway out of his own mouth, held back by the Goddess’s might.

अर्धनिष्क्रान्त एवासौ युध्यमानो महासुरः ।
तया महासिना देव्या शिरश्छित्त्वा निपातितः ॥ ४२ ॥

ardhaniṣkrānta evāsau yudhyamāno mahāsuraḥ |
tayā mahāsinā devyā śiraśchhittvā nipātitaḥ

अर्धा बाहेर आलेला असूनही तो महादैत्य लढत होता; तेव्हा देवीने महाखड्गाने त्याचे मस्तक छाटून त्याला पाडले.

आधा निकला होने पर भी वह महादैत्य देवी से युद्ध करने लगा। तब देवी ने बहुत बड़ी तलवार से उसका मस्तक काट गिराया।

Still fighting, only half come out, the great demon was felled by the Goddess, who cut off his head with her great sword.

ततो हाहाकृतं सर्वं दैत्यसैन्यं ननाश तत् ।
प्रहर्षं च परं जग्मुः सकला देवतागणाः ॥ ४३ ॥

tato hāhākṛtaṃ sarvaṃ daityasainyaṃ nanāśa tat |
praharṣaṃ cha paraṃ jagmuḥ sakalā devatāgaṇāḥ

मग हाहाकार करत सारे दैत्यसैन्य नष्ट झाले आणि सर्व देवगण अत्यंत आनंदित झाले.

फिर तो हाहाकार करती हुई दैत्यों की सारी सेना नष्ट हो गई तथा सम्पूर्ण देवता अत्यन्त प्रसन्न हो गए।

Then, crying out in dismay, the whole demon army perished, and all the hosts of the gods rejoiced greatly.

तुष्टुवुस्तां सुरा देवीं सह दिव्यैर्महर्षिभिः ।
जगुर्गन्धर्वपतयो ननृतुश्चाप्सरोगणाः ॥ ॐ ॥ ४४ ॥

tuṣṭuvustāṃ surā devīṃ saha divyairmaharṣibhiḥ |
jagurgandharvapatayo nanṛtuśchāpsarogaṇāḥ || oṃ

देवांनी दिव्य महर्षींसह देवीची स्तुती केली; गंधर्वराज गाऊ लागले आणि अप्सरा नाचू लागल्या.

देवताओं ने दिव्य महर्षियों के साथ दुर्गा देवी की स्तुति की। गन्धर्वराज गान करने लगे और अप्सराएँ नृत्य करने लगीं।

The gods praised the Goddess together with the heavenly great sages; the lords of the gandharvas sang, and the apsarases danced.

इति श्रीमार्कण्डेयपुराणे सावर्णिके मन्वन्तरे देवीमाहात्म्ये महिषासुरवधो नाम तृतीयोऽध्यायः ॥ ३ ॥iti śrīmārkaṇḍeyapurāṇe sāvarṇike manvantare devīmāhātmye mahiṣāsuravadho nāma tṛtīyo'dhyāyaḥ || 3 ||

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